
CBSE Basic Maths पेपर की कठिनाई पर छात्र की नाराज़गी: “I Felt Completely Betrayed”
Central Board of Secondary Education (CBSE) की बोर्ड परीक्षा के दौरान Basic Mathematics पेपर की कठिनाई को लेकर एक छात्र की भावनात्मक प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। छात्र ने कहा, “I felt completely betrayed” यानी “मुझे पूरी तरह धोखा महसूस हुआ।”
यह बयान परीक्षा की अपेक्षाओं और वास्तविक प्रश्नपत्र के स्तर के बीच अंतर को लेकर छात्रों की नाराज़गी को दर्शाता है।
📚 क्या है मामला?
CBSE की कक्षा 10 में Basic Maths का विकल्प उन छात्रों के लिए होता है जो आगे गणित को मुख्य विषय के रूप में नहीं लेना चाहते। आमतौर पर इसे Standard Maths की तुलना में अपेक्षाकृत आसान माना जाता है।
लेकिन इस बार कई छात्रों ने दावा किया कि:
- पेपर अपेक्षा से अधिक कठिन था
- कुछ सवाल सिलेबस के दायरे से बाहर लगे
- समय प्रबंधन में दिक्कत हुई
🗣️ छात्र की प्रतिक्रिया क्यों वायरल हुई?
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर छात्र का बयान तेजी से शेयर किया गया।
- “पेपर Basic था, लेकिन सवाल Standard जैसे थे”
- “तैयारी के बावजूद कॉन्फिडेंस टूट गया”
कई अन्य छात्रों और अभिभावकों ने भी समान अनुभव साझा किए।
🎓 विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार:
- बोर्ड परीक्षाओं में कभी-कभी विश्लेषणात्मक (Analytical) सवाल ज्यादा हो सकते हैं
- पेपर का स्तर NCERT आधारित ही होता है
- घबराहट और परीक्षा का दबाव भी कठिनाई का कारण बन सकता है
हालांकि, कुछ शिक्षकों का मानना है कि पेपर की संरचना संतुलित होनी चाहिए ताकि Basic और Standard के बीच स्पष्ट अंतर बना रहे।
📊 आगे क्या हो सकता है?


4
- CBSE द्वारा पेपर का विश्लेषण
- मॉडरेशन या ग्रेस मार्क्स की संभावना
- आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी हो सकता है
अंतिम परिणाम और मार्किंग स्कीम से स्पष्ट होगा कि पेपर का वास्तविक प्रभाव क्या रहा।
📌 बड़ी तस्वीर
हर साल बोर्ड परीक्षाओं के बाद पेपर की कठिनाई को लेकर बहस होती है। लेकिन छात्रों की मानसिक स्थिति और उम्मीदों को ध्यान में रखना भी उतना ही जरूरी है।
छात्रों के लिए सलाह:
- एक पेपर के आधार पर आत्मविश्वास न खोएं
- आगे की परीक्षाओं पर फोकस रखें
- आधिकारिक उत्तर कुंजी का इंतजार करें